शोध नियमों के बारे में वक्तव्य 

राजनीति और शासन से संबंधित प्रायोगिक कार्यों से जुड़े कई नैतिक सरोकार या प्रश्न उठते हैं, जिनका सामना  शोधकर्ताओं और पेशेवर लोगों को करना पड़ता है. EGAP  नेटवर्क  ने अपनी चौथी मीटिंग में कुछ शोध नियमों को बनाया था, जिनकी बाद में मीटिंग के सदस्यों ने पुष्टि भी कर दी थी.

EGAP शोध नियम, जून २०११

EGAP- एविडेंस इन गवर्नेंस एंड पॉलिटिक्स नेटवर्क ने शासन व राजनीति संबंधी  प्रायोगिक शोध में लगे लोगों के व्यवहार के लिए कुछ दृढ एवं नैतिक नियम बनाए हैं, जो कि सरकारी और गैर सरकारी क्षेत्रों में नीति व निर्णय लेने संबंधी शोध करते समय प्रयुक्त होने चाहिए .

हम प्रतिज्ञा करते हैं कि हम अपना कार्य करते समय, उसके विश्लेष्ण व रिपोर्ट तैयार करते समय; एवं शोध प्रतिभागियों के  साथ अपने संबंधों में; अपने सहयोगियों के साथ और अंततः उन लोगों के लिए जो शोध का प्रयोग निर्णय लेने के लिए करते हैं; और साथ ही सामान्य जन के साथ भी, अपनी वैज्ञानिक क्षमता और अखंडता के निर्धारित उच्च मानकों को अपनाएंगे. ऐसा करने के लिए हम निम्नंकित नियमों का पालन करेंगे. 

नियम:

1. मनुष्यों की शोध विषय के रूप में रक्षा:

हम अपने शोध में प्रयुक्त मनुष्यों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. उस स्थिति में जब शोधकर्ता अन्य पेशेवर लोगों के साथ  जुड़े हों, तो एक समझौते के अंतर्गत यह तय करना और बताना आवश्यक है कि दोनों में से  हस्तक्षेप करने की मुख्य ज़िम्मेदारी किसकी होगी. शोधकर्ता को इस हस्तक्षेप में अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए, विशेषरूप से यदि यह हस्तक्षेप अन्य पेशेवर लोगों अथवा तीसरी पार्टी के द्वारा लागू होने वाला  है.

2. पारदर्शिता

रिपोर्ट करते समय , किसी भी तरह के पक्षपात या पूर्वाग्रह  को सीमित करने और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए शोधकर्ता को शोध डिज़ाइन , परिकल्पना  और परीक्षा प्रश्नावली इत्यादि  को डाटा सामग्री इकठ्ठा करने एवं विश्लेष्ण करने से  पहले  पंजीकृत करवा लेनी चाहिए. अपने शोध परिणामों के प्रस्तुतीकरण के समय प्रत्याशित  और पूर्व व्यापी अवधारणाओं पर आधारित विश्लेषणों के अंतर को स्पष्ट करना चाहिए. 

3. समीक्षा एवं शोध परिणाम के प्रकाशन के अधिकार :

शोधकर्ता एवं पेशेवर लोगों के सहकार्य के दौरान बजाय इसके कि शोध परिणाम आने के बाद, बल्कि पहले ही यह तय कर लेना चाहिए कि कौन सी डाटा सामग्री एवं परिणाम प्रकाशित किये जायेंगे. उन स्थितियों में जब ऐसे समझौते पहले से नहीं तय किये हों, तो यह तथ्य प्रकाशन के समय नोट किया जाना चाहिए.

4. डाटा सामग्री का प्रकाशन:

शोधकर्ता एवं पेशेवर लोगों के सहकार्य के दौरान, दोनों के बीच पहले ही यह समझौता हो जाना चाहिए कि विश्लेष्ण में प्रयुक्त डाटा को ( यदि पहचान योग्य सूचना का छिपाना आवश्यक न हो ) उसे इकठ्ठा करने के बाद एक विशिष्ट समय सीमा में प्रतिकृति बनाने के उद्देश्य से जनता के सम्मुख रखा जाएगा. 

५ पारिश्रमिक:

 शोधकर्ताओं को सामान्यत:  उन परियोजनाओं में, जिनके लिए वे अनुबंधित हैं, कोई पारिश्रमिक नहीं मिलता है. उन  स्थितियों में जब शोधकर्ता ऐसे संस्थानों से पारिश्रमिक लेते हैं तो यह तथ्य प्रकाशन के फुटनोट में बताना चाहिए.