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EGAP प्रधान शोधकर्ता: Simon Chauchard, Neelanjan Sircar
स्थान : भारत (India)

Registration: 20150925AA

हस्तक्षेप करने की तारीख : Fall 2015, विधान सभा चुनावों के समय

पृष्ठभूमि: भारत के बिहार राज्य में ढेर सारे वोटरों को उम्मीदवारों के अपराधिक गतिविधयों की जानकारी नहीं होती है। इसका मुख्य कारण यह है कि यह क्षेत्र अपराधिक छवि के नेताओं का गढ़ है और भ्रष्टाचर तथा जानकारी के कमी के कारण अपराधिक छवि के नेता लगातार चुने जाते रहे है। इस अध्धययन से यह समझने प्रयास की जायेगा की अगर विभिन्न राजनैतिक रूप से प्रभावशाली व्यक्तियों के माध्यम से अपराधिक छवि के नेताओं के बारें में सूचनाएं प्रदान की जाये तो क्या वह जवाबदेही बढ़ाएगा।

रिसर्च डिज़ाइन: अपराधिक छवि के नेताओं के बारें में सूचना को पोलिंग बूथ एरिया में अलग-अलग अनुपात (0%, 25% or 75%) में डोर-टू-डोर प्रचार के माध्यम से किया जायेगा।  वोटरों को  उम्मीदवारों के अपराधिक छवि के बारे में जो जानकारी, विशेषकर ऐसे अपराध जिससे सरकार को आर्थिक नुक़सान  हुआ हो (financial crimes  that may have led to a net loss to the exchequer) दी जाएगी। वैसे तो वोटरों को सर्वे कैंपेन के तहत पैम्फलेट (flyer) दिया जायेगा, परंतु इन्वेस्टिगेटर उस पर अंकित जानकारी का विवरण पढ़ कर सुनाएंगे। एक वैकल्पिक ट्रीटमेंट ग्रुप डोर-टू-डोर प्रचार के प्रभाव को नापेगा, जबकि एक व्यक्ति पोलिंग बूथ एरिया के हर घर जाकर सभी उपस्थित वोटरों को सभी प्रासंगिक जानकारी देंगे। विभिन्न रूप से और विभिन्न अनुपात में सूचनाएं प्रदान करने से क्या राजनैतिक जवाबदेही को बढ़ाया जा सकता है ?

प्रकल्पना :
  • बहुत सारे वोटरों को उम्मीदवारों के अपराधिक छवि के बारे में पहले से पता होता है पर वो उसे नजरअंदाज करते है शायद इसलिए की वो इस जानकारी को महत्वपूर्ण नहीं समझते या फिर उनकी नज़र में दबंग छवि की महत्वता है।